गोबर गैस (gobar gas) प्लांट कैसे लगाए ? इसके फायदे और उपयोग

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गोबर गैस (gobar gas)! यह शब्द आप लोगो ने कई बार सुना होगा। हम सब जानते हैं कि ईंधन हमारी जिंदगी की एक सबसे एहेम और खास जरूरतों में से एक है। एक जमाना वो भी था, जब लोग चूल्हे का इस्तेमाल करते थे खाना पकाने के लिए। लेकिन अब कुछ गिने चुने फैमिली ही बच गए हैं, जो चूल्हे का इस्तेमाल करते हैं खाना बनाने के लिए। खासकर गांव area में चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। खासकर मोदी जी ने जब से Free गैस कनेक्शन का वितरण करना चालू कर दिया है, तब से हर घर में गैस पे खाना पकाना संभव हो पाया है। 

आज का हमारा यह आर्टिकल ईंधन गैस यानी बायो गैस(biogas) के साथ ही जुड़ा हुआ ही है। दरअसल आज का हमारा title है गोबर गैस या बायो गैस। वैसे तो गोबर गैस और बायो गैस में हल्का सा फर्क है लेकिन गोबर गैस को बायो गैस कहना गलत भी नही है। खैर, उस हल्के से फर्क को भी हम आगे चलकर चर्चा करेंगे। लेकिन उससे पहले हम यह गोबर गैस या बायो गैस प्लांट के बारे में विस्तार से जानेंगे। आज हम ना सिर्फ यह जानेंगे कि गोबर गैस प्लांट कैसे बनाया जाता है बल्कि इस प्लांट के फायदे और यह कैसे काम करता है, इन सारी बातों को अच्छी तरह से समझेंगे। तो बिना समय गवाए चलिए गोबर गैस के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी प्राप्त कर लेते हैं।

gobar gas plant in hindi
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गोबर गैस क्या है? (What is gobar gas in Hindi)

दोस्तों, गोबर गैस या बायो गैस एक गैसीय ईंधन है, जिसमें मुख्य तौर पर मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और वाष्प पाई जाती है। हमारे भारत में गोबर गैस या बायो गैस का उपयोग मुख्य रूप से खाना बनाने के लिए और रौशनी करने के लिए किया जाता है। बात करें इसके उत्पादन की तो इस गैस के उत्पादन में विभिन्न तरह के जैविक अवशिष्ट पदार्थ जैसे कि – गोबर, पेड़, पत्ती, फसलों के तने, मनुष्य के अपशिष्ट, जलकुम्भी, इत्यादि जैसे बहुत सारी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। याद रखना जरूरी है कि बायो गैस ऑक्सिजन गैस की पूर्ण अनुपस्थिति में तैयार की जाती है। दरअसल ऑक्सिजन गैस की पूर्ण अनुपस्थिति में इन जैविक पदार्थो का अपघटन होता है। और उसी अपघटन से गोबर गैस की उत्पत्ति होती है। 

जो लोग बायो गैस का इस्तेमाल करते हैं, खाना पकाने के लिए उनके चूल्हे थोड़े से अलग होते हैं आम चूल्हों से। दरअसल उन चूल्हों का design वैसे तो ब्यूटेन पर चलने वाले चूल्हों के तरह ही होता है मगर सामान्य सा फर्क होता है। गोबर गैस वाले चूल्हों के बर्नर में वायु छिद्र का आकार थोड़ा सा बड़ा होता है। सूत्रों के मुताबिक एक घन मीटर बायो गैस से लगभग 4700 किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। 

बायो गैस और गोबर गैस में फर्क | Bio gas V/S Gobar Gas

वैसे तो गोबर गैस और बायो गैस में कोई भी बड़ा सा फर्क नहीं है ना ही इनको बनाने की टेक्नोलॉजी में कोई फर्क है। लेकिन हां, गोबर गैस और बायो गैस में जो छोटा सा फर्क है वह ये कि जहां बायोगैस बनाने में हम किसी भी कार्बनिक पदार्थ का इस्तेमाल कर सकते हैं वहीं गोबर गैस बनाने में हम सिर्फ और सिर्फ को गोबर का ही इस्तेमाल करते हैं। हालांकि यह फर्क बहुत ही छोटा है और आजकल ज्यादातर लोग गोबर गैस को ही बायोगैस कहते हैं जो किसी भी सूरत में यह तक कि वैज्ञानिक या तार्किक रूप से भी गलत नहीं है।

गोबर गैस क्या है इसके बारे में तो हमने थोड़ा बहुत जान लिया लेकिन अब बारी है यह जानने की गोबर प्लांट क्या है। तो चलिए अब गोबर गैस प्लांट के बारे में जान लेते हैं। 

गोबर गैस प्लांट क्या है? (What is Gobar Gas Plant?)

सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि गोबर गैस प्लांट बायो गैस जीवाश्म ईंधन या फिर मृत जैव सामग्री से बनाया जा सकता है। इस तरह का प्लांट बनाने के जो जरूरी सामान है, वो कुछ इस प्रकार है —

1. ईंट

2. सीमेंट

3. बजरी

4. काला पेंट

5. रेत

6. पाइप (जी. आई और आर. सी. सी)

7. गैस पाइप 

8. बर्नर

ऊपर दिए गए चीजो की मदत से गोबर गैस का प्लांट तैयार किया जाता है। कैसे? चलिए जानते हैं —

गोबर गैस प्लांट कैसे लगाए ?(How to setup Gobar gas Plant In Hindi.)

दोस्तों, बायो गैस प्लांट को कई तरह के design से तैयार किया जा सकता है। आपको जैसे सुविधा हो आप उसी design में इस प्लांट को बना सकते हो। इस प्लांट को मुख्य रूप से गोबर और पानी के घोल से चलाया जाता है। दरअसल इस प्लांट में एक आर.सी.पी पोप होता है जो लगभग 1 फुट चौड़ा और 4 फुट लंबा होता है। इस पाइप से ही प्लांट के अंदर गोबर डाला जाता है। गोबर के बाहर निकलने के लिए भी एक पाइप होता है, जो चौड़ा रखा जाता हैं, ताकि गोबर आसानी से बाहर निकल सके। इस प्लांट को बनाते समय काफी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके अंदर का भाग काफी बारीकी से बनाना पड़ता है। थोड़ा सा भी लीक अगर रह जाए तो पूरा प्रक्रिया खराब हो सकता है। अंदर का भाग लीकेज रहित बनाना बहुत जरूरी होता है। 

इन कामो को proper तरीके से कर लेने के बाद गैस की निकासी की जगह प्लास्टिक के एक पाइप से अपने kitchen के चूल्हे से भी जोड़ा जा सकता है। लेकिन इन सब के बीच एक बात का ध्यान रखना बहुत ज्यादा जरूरी है कि गोबर गैस बनाने की प्रक्रिया में गोबर बहुत जल्दी सुख जाता है, तो उनको ठिकाने लगाने के लिए व्यवस्था पहले से ही करके रखना जरूरी होता हैं। तो इस तरह से गोबर गैस का प्लांट तैयार किया जाता है।

गोबर गैस प्लांट से गैस तैयार करने की विधि

गोबर गैस का प्लांट तैयार हो जाने के बाद उस प्लांट में गोबर और पानी का घोल भर दिया जाता है। उसके बाद 10 से 15 दिनों के लिए गैस निकलने वाले पाइप को अच्छी तरह से बंद करके उसको वैसे ही छोड़ दिया जाता है। कुछ दिनों के बाद जब गोबर बाहर आना शुरू हो जाता है तब नया गोबर उसमें डाला जाता है। ध्यान रखें कि प्लांट के क्षमता अनुसार ही गोबर उसमे डालना चाहिए नहीं तो प्लांट खराब हो सकता है। तो इसी प्रकार गोबर गैस प्लांट से गोबर गैस तैयार किया जाता है।

बायो गैस प्लांट बनाते समय खयाल रखने योग्य कुछ बाते

1. अगर आपके घर मे गोबर की अच्छी खासी आमदनी है तभी आप बायो गैस प्लांट लगाने के बारे में सोचे। मान कर चलिए अगर आप बायो गैस प्लांट लगाने का मन बना रहे हैं तो सुनिश्चित कर ले कि आपके घर में 4 से 5 गाय अवश्य हो।

2. गोबर गैस प्लांट के आकार पर भी ध्यान देना जरूरी है। ध्यान रहे रोजाना जितनी मात्रा में गोबर प्राप्त हो रही है उसी हिसाब से प्लांट का आकार रखे। यह ज्यादा बड़ा या छोटा नहीं होना चाहिए।

3. अगर आपको गोबर गैस प्लांट बनाने की अच्छी खासी जानकारी है तभी आप इस प्लांट को बनाये। आधी अधूरी जानकारी या किसी से थोड़ा-बहुत सीखकर आप प्लांट बनाने ना जाए या फिर किसी प्रशिक्षित और जानकार व्यक्ति की देखरेख में आप गोबर गैस प्लांट बना सकते हैं।

4. प्लांट बनाने के लिए उपयोग की गई सारी चीजें खासकर ईंट और सीमेंट उन्नत किस्म का हो इस पर की पुष्टि पहले ही कर ले। ध्यान रहे, छत से किसी प्रकार की लीकेज बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

5 तैयार की गई गैस का प्रयोग जिस जगह पर करना है उसके नजदीक ही प्लांट लगाए। ताकि गैस के उत्पन्न करने से लेकर उसका प्रयोग करने में कोई बाधा ना आए।

सफल गौबर गैस प्लांट लगाने की पूरी जानकारी | complete information of bio gas plant, Gobar gas plant

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गोबर गैस प्लांट लगाने के फायदे (Benefits of Gobar Gas Plant in Hindi)

दोस्तों, गोबर गोबर गैस प्लांट लगाने से पहले उससे होने वाले फायदों के बारे में जान लेना बहुत जरूरी है। क्योंकि जब तक हम किसी काम को करने के फायदे नहीं जान लेते तब तक उस काम को करने में हमारी रुचि नहीं आती। इसीलिए हम आप लोग को गोबर गैस प्लांट लगाने के फायदे के बारे में बताना चाहते हैं। जो कुछ इस प्रकार है —

पेड़ पौधों की सुरक्षा 

लकड़ियों पर खाना बनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है जब ईंधन गैस कोई सुविधा नहीं थी तो खाना पकाने के लिए लोग लकड़ियों का इस्तेमाल करते थे। जिसका परिणाम है या है कि पेड़ पौधों की संख्या में भारी गिरावट आई और यह गिरावटें लगातार जारी है। आज भी बहुत से परिवार में खासकर ग्रामीण इलाकों में लकड़ियों का इस्तेमाल किया जाता हैं गैस की जगह। लेकिन वही पर अगर हम गोबर गैस का इस्तेमाल करेंगे कि लकड़ियों की काफी मात्रा में बचत होगी जिससे पेड़ पौधों को लोग कम काटेंगे और प्रदूषण मुक्त परिवेश का निर्माण होगा।

गृहणियों के हाथों को आराम

आप लोगों ने देखा होगा कि गांव area में बहुत सारे गाय भैंस से पाले जाते हैं। जिनके गोबर से वहां की गृहणियां उपले बनाती है। फिर उस उपले को धूप में सुखाकर ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह सारे काम बहुत मेहनत का होता है और उससे गृहणियों को काफी तकलीफ होती है। तो उपले बनाने की जगह अगर उन गोबरों का इस्तेमाल बायोगैस का निर्माण कार्य में किया जाये तो उससे गृहणियों को भी काफी आराम मिल जायेगा और उसी गोबर को हम इंधन के रूप में इस्तेमाल भी कर सकेंगे।

धुंआधार जिंदगी से मुक्ति

हम सभी को पता है कि लकड़ियों पर या उपलों द्वारा खाना बनाने समय काफी धुआ निकलता है। जिससे खाना बनाने वाले के आंखों को नुकसान होने के साथ ही काफी सारी बीमारियां दस्तक देती है। लेकिन अगर हम बायो गैस का प्लांट लगाकर उससे निर्मित गैस का प्रयोग खाना पकाने के लिए करे तो ना ही उससे कोई धुंआ निकलेगा और ना ही किसीको कोई नुकसान होगा। इसीलिए धुंए से बचाव के लिए यह एक अच्छा तरीका है।

गोबर का दुगना उपयोग 

अगर हम गोबर के उपले बनाएंगे तो उसका इस्तेमाल सिर्फ ईंधन के रूप में ही कर पाएंगे क्योंकि उपले जल जाने के बाद सिर्फ कचरा ही शेष रह जाता है,  जिसको फेकने के अलावा कोई चारा नहीं होता। लेकिन अगर गोबर का इस्तेमाल बायो गैस के निर्माण में किया जाये तो गैस तैयार होने के बाद जो गोबर बाहर आता है उसकी गुणवत्ता बिल्कुल भी नष्ट नही हुई होती और उसी गोबर को हम अपने खेतों और बगीचों में खाद के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। बचा हुआ गोबर एक उन्नत किस्म का खाद होता है। तो इस प्रकार से गोबर का दोहरा प्रयोग संभव हो जाता था।

स्वच्छ परिवेश

बहुत लोग ऐसा भी करते हैं कि अपने घर के गोबरों को फेक देते हैं जिससे परिवेश काफी गंदा होता है। ज्यादातर शहर के लोग गांव में इसलिए नहीं जाना चाहते क्योंकि वहां पे गोबर की बदबू होती हैं। लेकिन अगर वहीं पर एक बायो गैस प्लांट लगा दिया जाय तो सारे गोबर उसी प्लांट में डाले जाएंगे और इस तरह स्वच्छता बरकरार रह सकेगी। और तो और क्योंकि प्लांट ढका हुआ होता हैं, तो वहां से बदबू आने की भी कई संभावना नही रहती।

ज्यादा खर्चीला भी नहीं है 

आपको बता दें कि बायो गैस प्लांट लगाना उतना भी खर्चीला नहीं है। थोड़ी सी समझदारी और ज्ञान की बस जरूरत है इस प्लांट को लगाने के लिए। बजट का issue नही होता इस प्लांट को लगाने के लिए। क्योंकि इस प्लांट को लगाना ज्यादा खर्चीला नही है, इसको कोई भी आसानी से लगा सकता है और गैस का उपयोग कर सकता है।

निष्कर्ष – Conclusion

तो दोस्तों! कैसा लगा आपको हमारा यह “गोबर गैस (gobar gas) प्लांट कैसे लगाए ? इसके फायदे और उपयोग” आर्टिकल? उम्मीद करते है यह लेख आप लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुआ होगा और आप लोगों ने गोबर गैस या बायोगैस प्लांट के बारे में इस लेख से बहुत कुछ सीखा होगा। इस पोस्ट में हमने बायो गैस प्लांट के फायदे से लेकर इसको बनाने की विधि और उपयोग इत्यादि जैसे हर एक पॉइंट को बहुत carefully add किया है। जिससे आप लोगों को गोबर गैस या बायोगैस के बारे में पूरी जानकारी मिल सके।

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GOBAR-DHAN Yojana Portal (गोबर-धन योजना पोर्टल)

पशुपालन विभाग, ग्रामीण विकास विभाग के साथ, जल शक्ति मंत्रालय ने Gobar Dhan Portal लांच किया है । इस पोर्टल के लांच पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गोबर धन पोर्टल स्वच्छ भारत का एक भाग है।जिसमे मवेशियों के गोबर से बायोगैस बनाई जाएगी।

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